मंगलवार, 22 मई 2012

कुछ तो ब्लॉगर कहेंगे, ब्लॉगरों का काम है कहना : संतोष त्रिवेदी


संदर्भ : परिकल्पना सम्मान-2012
स्त्रोत जहां से चिंगारी उठी :  द्वितीय परिकल्पना सम्मान की उद्घोषणा 

यह चिंगारी देखते-देखते आग की लपटों मे तब्दील हो गयी । रवीन्द्रप्रभात जैसे अनुभवी और कद्दाबर ब्लॉगर को लोग देने लगे बचकानी नसीहतें । उन्हें शायद नहीं मालूम कि रवीन्द्र प्रभात उन बिरले व्यक्तित्व मे से एक हैं जिनके ऊपर न तो विरोध का प्रभाव पड़ता है और न थोथी दलीलों का । मैं गवाह हूँ पिछले वर्ष संपन्न हुयी परिकल्पना सम्मान समारोह का, जब दिल्ली का हिन्दी भवन खचाखच भरे देश-विदेश के मूधन्य ब्लॉगरों से सजा था और मंच पर उद्घोषित हो रहे थे कई अद्भुत और विषमयकारी उद्घोषणायें। साक्षी था समय और समय के वे पहरूए जिनके होने मात्र से गरिमामय था समारोह । 

रवीन्द्र जी को दिये जाने वाले सुझावों की एक लंबी श्रृंखला है, शायद हिन्दी ब्लोगिंग के इतिहास मे यह पहली बार हुआ होगा जब किसी एक व्यक्ति की पहल की प्रतिकृया मे दर्जनों पोस्ट और कई सौ टिप्पणियाँ आई होंगी । रवीन्द्र जी की लोकप्रियता का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है ।

इन सारे पोस्ट और प्रतिक्रियाओं के मंथन के पश्चात दिव्या केएक पोस्ट पर रवीन्द्र जी की नज़र पड़ी और वे उनके सुझाव पर खुल्ला खेल फरुखावादी खेलने को उत्सुक हुये और खेला भी । मगर इस सुझाव मे लोगों ने हदें पार कर दी और अपने-अपने शुभचिंतकों को नामित करना शुरू कर दिया, बिना किसी आधार के । जिसने कभी जीवन मे कहानी नहीं लिखी उन्हें कथाकार के रूप मे नामित किया गया । जिसने कभी कविता नहीं लिखी उन्हें कवि और कवियित्रि के लिए नामित किया गया। जिसने कभी ब्लॉग की समीक्षा नहीं की उन्हें ब्लॉग समीक्षक के लिए नामित किया गया । वाह रे ब्लॉग जगत वाह ।

यानि फ्लॉप हो गयी दिव्या जी की भी सलाह ।

अब एक नयी सलाह आई है नुक्कड़ पर संतोष त्रिवेदी जी की, जिनहोने पूरे प्रकरण का गहन अध्ययन किया है और सारगर्भित सलाह दी है कि “मैं तो यही कहूँगा कि रवीन्द्र जी कि आपके सारे प्रयोग विफल करने की सुनियोजित तरीके से मुहिम चलाई जा रही है, उसे समझने की कोशिश कीजिये और वैसे ही कीजिये जैसे आपने अपने कुछ निर्णायकों की मदद से पिछले वर्ष किया था। आपकी नियत पर जो संदेह कर रहे हैं उनकी परवाह करने की कोई जरूरत नहीं। आपकी तथा आपके द्वारा गठित निर्णायकों की राय मे जो ब्लॉगर पात्रता रखते हैं, उन्हें सम्मानित कर आपको जो खुशी होगी वो शायद इन विवादित टिप्पणियों को आत्मसात कर नहीं होगी । इसलिए अब समय आ गया है कि रवींद्र जी इस सम्मान-समारोह की गरिमा को बनाये रखें,इसे सीमित रखें और ऐसे वरिष्ठ लोगों का एक पैनल बनायें जो ब्लॉग-विषय और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखें.जो लोग पैनल में हों,उनके अपने ब्लॉग इस दौड़ से बाहर हों. . उम्‍मीद करता हूं कि अब अवश्‍य ही कुछ सार्थक निकलकर हिंदी ब्‍लॉग जगत के हित में सामने आएगा,फिर भी रवीन्द्रजी,आपका निर्णय अंतिम और मान्य होगा,आप जैसा उचित समझें,वैसा करें ।"

मैं तो सहमत हूँ इस सुझाव से........ क्या आप भी सहमत है?


सोमवार, 12 मार्च 2012

गिरीश पंकज और शिखा वार्ष्णेय को प्रब्लेस का सम्मान

 
विगत दिनों प्रब्लेस शिखर सम्मान की घोषणा की गयी थी, जिसके अंतर्गत "नागार्जुन जन्मशती कथा सम्मान" हेतु वर्ष-2011 में प्रकाशित दलित विमर्श पर आधारित उपन्यास "ताकि बचा रहे लोकतंत्र" के लेखक श्री रवीन्द्र प्रभात का,"शमशेर जन्मशती काव्य सम्मान" हेतु वर्ष-2010 में प्रकाशित काव्य संग्रह "शब्दों का रिश्ता" की कवयित्री श्रीमती रश्मि प्रभा का तथा  "प्रब्लेस चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान" हेतु वर्ष-2011 में प्रकाशित पुस्तक "हिंदी ब्लॉगिंग:अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति" के संपादक द्वय श्री अविनाश वाचस्पति और श्री रवीन्द्र प्रभात का चयन संयुक्त रूप से किया गया था ।

इसले अलावा "केदारनाथ जन्मशती साहित्य सम्मान" हेतु श्री अरविन्द श्रीवास्तव (मधेपुरा), "गोपाल सिंह नेपाली जन्मशती काव्य सम्मान" हेतु श्री शहंशाह आलम (पटना),"अज्ञेय जन्मशती पत्रकारिता सम्मान" हेतु डा. सुभाष राय (लखनऊ)  का चयन करते हुए उद्घोषणा की गयी थी ।

इसके अलावा इस अवसर पर दो और विशेष सम्मान कविवर जानकी बल्लभ शास्त्री और व्यंग्यकार श्री लाल शुक्ल की स्मृति में प्रदान किये जाने की बात की गयी थी 


आज यह उद्घोषणा करते हुए मुझे अपार ख़ुशी हो रही है कि चयन समिति ने उपरोक्त दोनों सम्मान हेतु निम्न सृजनधर्मियों का चयन करते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है :

1) "जानकी बल्लभ शास्त्री साहित्य सम्मान" हेतु श्रीमती शिखा वार्ष्णेय (लन्दन) को उनकी कृति स्मृतियों में रूस के लिए 

2) "श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान" हेतु  श्री गिरीश पंकज (रायपुर , छतीसगढ़ ) को उनके व्यंग्य संग्रह ''हिट होने के फामूले''  के लिए ।

उपरोक्त सम्मान के अंतर्गत दोनों लेखकों को 2500/- नगद,सम्मान पत्र,श्रीफल,स्मृति चिन्ह,अंग वस्त्र आदि किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा प्रदान किये जायेंगे ।

सम्मान समारोह की तिथि और स्थान की उद्घोषणा शीघ्र की जायेगी ।

बृहस्पतिवार, 16 फरवरी 2012

प्रब्लेस शिखर सम्मान की उद्घोषणा.....

जैसा कि विगत वर्ष 21 मई 2011   को प्रगतिशील  ब्लॉग लेखक संघ की ओर से यह घोषणा की गयी थी कि इस वर्ष 17 फरवरी को प्रब्लेस अपना  पहला वार्षिक महाधिवेशन मनायेगा जिसमें साहित्य और ब्लॉगिंग से संवंधित तीन शिखर सम्मान दिए जायेंगे इस सम्मान हेतु वर्ष-2010 -2011 में प्रकाशित कृतियों को चयन का आधार बनाया गया था मुझे ख़ुशी है कि इसके लिए कई अच्छे लेखकों की प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई, साथ ही कई महत्वपूर्ण सुझाव भी प्राप्त हुए हैं जिसके आधार पर शिखर सम्मान हेतु तीन लेखकों का चयन इस प्रकार किया गया है : 


1) "नागार्जुन जन्मशती कथा सम्मान" हेतु वर्ष-2011 में प्रकाशित दलित विमर्श पर आधारित उपन्यास "ताकि बचा रहे लोकतंत्र" के लेखक श्री रवीन्द्र प्रभात का चयन किया गया है 


2)"शमशेर जन्मशती काव्य सम्मान" हेतु वर्ष-2010 में प्रकाशित काव्य संग्रह "शब्दों का रिश्ता" की कवयित्री श्रीमती रश्मि प्रभा  का चयन किया गया है 


3)"प्रब्लेस चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान" हेतु वर्ष-2011 में प्रकाशित पुस्तक "हिंदी ब्लॉगिंग:अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति" के संपादक द्वय श्री अविनाश वाचस्पति और श्री रवीन्द्र प्रभात का चयन  संयुक्त रूप से  किया गया है 


उपरोक्त सम्मान के अंतर्गत प्रत्येक सम्मान के लिए सृजनधर्मियों को 15000/- नगद,सम्मान पत्र,श्रीफल,स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र आदि किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा प्रदान किये जायेंगे  


उल्लेखनीय है कि उपरोक्त तीनों शिखर सम्मान हेतु काफी मात्रा में प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई । कुछ लेखक अपनी प्रविष्टियों से चयन समिति का दिल जितने में सफल रहे हैं और प्रब्लेस ने उन्हें भी इस अवसर पर सम्मानित करने का फैसला किया है, जिनके नाम इस प्रकार है : 


1) "केदारनाथ जन्मशती साहित्य सम्मान" हेतु श्री अरविन्द श्रीवास्तव (मधेपुरा)
2) "गोपाल सिंह नेपाली जन्मशती काव्य सम्मान" हेतु श्री शहंशाह आलम (पटना)
3) "अज्ञेय जन्मशती पत्रकारिता सम्मान" हेतु डा. सुभाष राय (लखनऊ)


उपरोक्त सम्मान के अंतर्गत तीनों लेखकों को 5100/- नगद,सम्मान पत्र,श्रीफल,स्मृति चिन्ह, अंग वस्त्र आदि किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा प्रदान किये जायेंगे  


इसके अलावा इस अवसर पर दो विशेष सम्मान विगत वर्ष हम सबका साथ छोड़ गए कविवर जानकी बल्लभ शास्त्री और व्यंग्यकार श्री लाल शुक्ल की स्मृति में प्रदान किये जायेंगे :

1) "जानकी बल्लभ शास्त्री साहित्य सम्मान" हेतु उद्घोषणा बाद में की जायेगी 
2) "श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान" हेतु उद्घोषणा बाद में की जायेगी


उपरोक्त सम्मान के अंतर्गत दोनों लेखकों को 2500/- नगद,सम्मान पत्र,श्रीफल,स्मृति चिन्ह,अंग वस्त्र आदि किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा प्रदान किये जायेंगे  


उत्तर प्रदेश में चुनाव का माहौल होने के कारण ये सम्मान चुनाव बाद  मई के किसी कार्य दिवस में तहजीब की नगरी लखनऊ में प्रब्लेस के प्रथम वार्षिक महाधिवेशन में प्रदान किये जायेंगे  
सभी लेखकों को बधाईयाँ और शुभकामनाएं !


शुभेच्छु :
मनोज कुमार पाण्डेय
संयोजक : प्रब्लेस 

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

हिंदी के एक खास ब्लॉगर से खास मुलाक़ात ...


जी हाँ हिंदी ब्लॉग जगत में एक व्यक्ति है रवीन्द्र प्रभात किन्तु लोग कहते हैं कि वह व्यक्ति नहीं विश्व है । रवीन्‍द्र प्रभात ब्‍लॉग जगत में सिर्फ एक कुशल रचनाकार के ही रूप में नहीं जाने जाते हैं, उन्‍होंने ब्‍लॉगिंग के क्षेत्र में कुछ विशिष्‍ट कार्य भी किये हैं। वर्ष 2007 में उन्‍होंने ब्‍लॉगिंग में एक नया प्रयोग प्रारम्‍भ किया और ‘ब्‍लॉग विश्‍लेषण’ के द्वारा ब्‍लॉग जगत में बिखरे अनमोल मोतियों से पाठकों को परिचित करने का बीड़ा उठाया। 2007 में पद्यात्‍मक रूप में प्रारम्‍भ हुई यह कड़ी 2008 में गद्यात्‍मक हो चली और 11 खण्‍डों के रूप में सामने आई। वर्ष 2009 में उन्‍होंने इस विश्‍लेषण को और ज्‍यादा व्‍यापक रूप प्रदान किया और विभिन्‍न प्रकार के वर्गीकरणों के द्वारा 25 खण्‍डों में एक वर्ष के दौरान लिखे जाने वाले प्रमुख ब्‍लागों का लेखा-जोखा प्रस्‍तुत किया। इसी प्रकार वर्ष 2010 में भी यह अनुष्‍ठान उन्‍होंने पूरी निष्‍ठा के साथ सम्‍पन्‍न किया और 21 कडियों में ब्‍लॉग जगत की वार्षिक रिपोर्ट को प्रस्‍तुत करके एक तरह से ब्‍लॉग इतिहास लेखन का सूत्रपात किया।ब्‍लॉग जगत की सकारात्‍मक प्रवृत्तियों को रेखांकित करने के उद्देश्‍य से अभी तक जितने भी प्रयास किये गये हैं, उनमें ‘ब्‍लॉगोत्‍सव’ एक अहम प्रयोग है। अपनी मौलिक सोच के द्वारा रवीन्‍द्र प्रभात ने इस आयोजन के माध्‍यम से पहली बार ब्‍लॉग जगत के लगभग सभी प्रमुख रचनाकारों को एक मंच पर प्रस्‍तुत किया और गैर ब्‍लॉगर रचनाकारों को भी इससे जोड़कर समाज में एक सकारात्‍मक संदेश का प्रसार किया।

वर्ष-2010 का वर्धा सम्मलेन हो,अथवा वर्ष-2011 की खटीमा ब्लॉगर संगोष्ठी । कल्याण (मुम्बई) की राष्ट्रीय ब्लॉगर संगोष्ठी हो अथवा बैंकॉक का अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन ...सभी जगह जहां इनकी सार्थक उपस्थिति रही वहीँ इनके द्रारा प्रसारित वक्तव्य को हिंदी ब्लॉग जगत ने सिर आँखों पर लिया । अप्रैल-2011 में इन्होने 51 वरिष्ठ-कनिष्ठ ब्लॉगर्स को भारत की राजधानी दिल्ली में परिकल्पना सम्मान से सम्मानित कर ब्लॉगिंग की ताक़त का एहसास कराया । इन्होनें अविनाश वाचस्पति के साथ मिलकर हिंदी ब्लॉगिंग की पहली मूल्यांकनपरक पुस्तक का संपादन किया, वहीँ पहली बार हिंदी ब्लॉगिंग का इतिहास प्रकाशित कर एक नया इतिहास रच दिया । वर्ष-२००९ में ब्लॉग विश्लेषण के लिए संवाद डोट कॉम ने इन्हें संवाद सम्मान से सम्मानित किया । इस वर्ष 11 जनवरी को खटीमा ब्लॉगर मीट के दौरान साहित्य शारदा मंच ने इन्हें "ब्लॉग श्री", दिनांक 09 दिसंबर को यु. जी. सी. संपोषित राष्ट्रीय ब्लॉगर संगोष्ठी कल्याण (मुम्बई) में इन्हें "ब्लॉग भूषण" तथा दिनांक 18 दिसंबर को बैंकॉक में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन में हिंदी ब्लॉगिंग में उल्लेखनीय कार्य हेतु "सृजन श्री" सम्मान से सम्मानित किया गया ।


इस वर्ष इनका पहला उपन्यास "ताकि बचा रहे लोकतंत्र" भी आया है और दलित विमर्श के कारण यह उपन्यास आजकल काफी चर्चा में है । विगत एक सप्ताह से मैं लखनऊ में हूँ, मैंने रवीन्द्र जी को फोन किया कि मैं आपसे मिलना चाहता हूँ, उन्होंने सहर्ष अपनी स्वीकृति दी और उनसे मिलने उनके आवास पर गया, जहां विभिन्न विषयों पर उन्होंने खुलकर चर्चा की । प्रस्तुत है रवीन्द्र प्रभात जी से हुई गुफ्तगू का मुख्य अंश :

नमस्कार रवीन्द्र जी !
उत्तर: नमस्कार

इस बार माह दिसंबर में आपने ब्लॉग विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया, क्यों ?
उत्तर: दरअसल,इसबार दिसंबर के महीने में लगातार मैं शहर से बाहर रहा, कभी कल्याण,कभी मुम्बई कभी थाईलैंड तो कभी कोलकता की यात्रा पर । व्यस्तता अधिक थी, इसलिए विश्लेषण प्रस्तुत करना संभव नहीं हो सका   वैसे मेरी कोशिश है कि इसे जनवरी-2012 के प्रथम पक्ष  में प्रस्तुत किया जाए  


कल्याण ब्लॉगर संगोष्ठी में आपने इस वर्ष के कुछ आंकड़े प्रस्तुत किये थे,आपकी नज़रों में इस समय हिंदी के कितने ब्लॉग हैं ?
उत्तर:चिट्ठाजगत के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष की प्रथम तिमाही में लगभग सबा छ: हजार के आसपास हिंदी के ब्लॉग अबतरित हुए हैं, दूसरी तिमाही में पांच हजार आठ सौ  इसके बाद चिट्ठाजगत ने आंकड़े देने बंद कर दिए   मैंने परिकल्पना की ओर से  ब्लॉग सर्वे किया था और कुल मिलाकर जिस निष्कर्ष पर पहुंचा उसके हिसाब से इस वर्ष २० हजार के आसपास हिंदी के ब्लॉग अवतरित हुए हैं , जिसमें से लगभग एक हजार के आसपास पूर्णत: सक्रीय है   इस वर्ष के आंकड़ों को पूर्व आंकड़ों  में मिला दिया जाए तो लगभग ५० हजार ब्लॉग हिंदी के हैं, किन्तु सक्रियता की दृष्टि से देखा जाए तो हिंदी अभी भी काफी पीछे है क्योंकि हिंदी में सक्रीय ब्लॉग की संख्या अभी भी पांच हजार से ज्यादा नहीं है  वहीँ भारत की विभिन्न भाषाओं को मिला दिया जाये तो अंतरजाल पर यह संख्या पांच लाख के आसपास है  तमिल, तेलगू और मराठी में हिंदी से ज्यादा सक्रिय ब्लॉग है  

आपको हिंदी के पहले इतिहासकार के रूप में एक पहचान मिली है और आप हिंदी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक के रूप में अपनी छवि बिकसित करने में सफल हुए हैं, इसकी प्रेरणा आपको कहाँ से मिली ?
उत्तर:मेरी समझ से कार्य बड़े होते हैं अलंकरण नहीं  शुरुआत छोटी ही होती है। धीरे-धीरे बड़ा काम अन्जाम दे दिया जाता है। दो दशक के साहित्यिक अनुभव के पश्चात जब मैंने ब्लॉगिंग में कदम रखा तो उस समय हिंदी के ५०-६० सक्रीय ब्लॉगर ही थे   मैंने मजाक-मजाक में वर्ष-२००७ में ब्लॉग विश्लेषण शुरू किया जो आगे चलकर एक दुरूह कार्य में परिवर्तित हो गया   मैंने हिम्मत नहीं हारी और इस यज्ञ को जारी रखा फिर अपने आप सबकुछ होता चला गया   

आपको नहीं लगता कि ब्लॉगिंग में चर्चित हो जाने से आपका साहित्यकार पक्ष गौण होता जा रहा है ?
उत्तर:नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता  क्योंकि ब्लॉगिंग विधा नहीं एक नया माध्यम है विचारों को प्रस्तुत करने का  चाहे वह साहित्यिक विचार हों,सामाजिक हो अथवा सांस्कृतिक  यदि मैं कहूं कि ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति का एक ऐसा  माध्यम है जो अन्य सभी माध्यमों से सशक्त है तो शायद किसी को न अतिश्योक्ति होगी और न शक की गुंजाईश ही  

कुछ सोचते हुए,थोड़ा रुककर फिर उन्होंने कहा :
उत्तर:यहाँ नयी बातें पता चलती हैं, लिखने-पढ़ने की इच्छा पूरी होती है, टिप्पणियों के ज़रिये सराहना मिलती है, अच्छे पाठक और दोस्त मिलते हैं  बहुत कुछ लिखने और पढ़ने के दौरान हमें अपनी कमियों और खूबियों का पता भी चल जाता है  कहा गया है कि ब्लॉगिंग की दुनिया समय और दूरी के सामान अत्यंत विस्तृत और व्यापक है, साथ ही पूरी तरह स्वतंत्र,आत्म निर्भर और मनमौजी किस्म की है । यहाँ आप स्वयं लेखक, प्रकाशक और संपादक की भूमिका में होते हैं । यहाँ केवल राजनीतिक टिप्पणियाँ और साहित्यिक रचनाएँ ही प्रस्तुत नहीं की जाती वल्कि महत्वपूर्ण किताबों का इ प्रकाशन तथा अन्य सामग्रियां भी प्रकाशित की जाती है । हिंदी में आज फोटो ब्लॉग, म्यूजिक  ब्लॉग, पोडकास्ट, , वीडियो ब्लॉग, सामूहिक ब्लॉग, प्रोजेक्ट ब्लॉग, कारपोरेट ब्लॉग आदि का प्रचलन तेजी से बढ़ा है । यानी हिंदी ब्लॉगिंग आज वेहद संवेदनात्मक दौर में है । 

हिंदी ब्लॉगिंग के अबतक की विकास यात्रा से आप संतुष्ट हैं ?
उत्तर:नहीं,अन्य भाषाओं की तुलना में हम काफी पीछे हैं । अग्रेजी के ब्लॉग की संख्या से यदि हिंदी की तुलना की जाए तो कई प्रकाश वर्ष का अंतर आपको महसूस होगा । फिर भी देखा जाए तो सामाजिक सरोकार से लेकर तमाम विषयों को व्यक्त करने  की दृष्टि से सार्थक ही नहीं सशक्त माध्यम बनती जा रही है यह हिंदी ब्लॉगिंग । आज हिंदी ब्लॉगिंग एक समानांतर मीडिया का रूप ले चुकी  है और अपने सामाजिक सरोकार को व्यक्त करने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता और वचनबद्धता  के साथ सक्रिय है । आज अपनी अकुंठ संघर्ष चेतना और सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक सरोकार के बल पर हिंदी ब्लॉगिंग महज आठ साल की अल्पायु में ही हनुमान कूद की मानिंद जिन उपलब्धियों  को लांघने में सफल हुई है वह कम संतोष की बात नहीं है ...! 


एक बार रवि रतलामी जी ने कहा था की नए सुर-तुलसी ब्लॉगिंग के जरीय ही पैदा होंगे,क्या आप इन बातों से सहमत हैं ?
उत्तर:पूरी तरह सहमत हूँ,क्योंकि इस बक्तव्य में न कोई शक है और न अतिश्योक्ति हीं । रवि जी का मैं बहुत सम्मान करता हूँ ,अभी ९ दिसंबर को कल्याण ब्लॉगर संगोष्ठी में उनसे मुलाक़ात हुयी थी,उनके व्यक्तित्व ने भी मुझे काफी प्रभावित किया। प्रयोगधर्मी ब्लॉगरों की श्रेणी में मैं उन्हें  सर्वोपरि मानता हूँ 


आज हिंदी ब्लॉगिंग को प्रिंट मीडिया काफी महत्व दे रहा है,प्रारंभिक दिनों में लोगों ने काफी मेहनत की होगी, आपकी नज़रों में प्रारंभिक दिनों के कौन-कौन  से ब्लॉगर ने ब्लॉगिंग को मजबूती देने का काम किया है ?


 उत्तर:फेहरिश्त लंबी है उसमें स्व. अमर कुमार के साथ-साथ श्रीमती पूर्णिमा बर्मन,श्री शास्त्री जे. सी. फिलिप,रवि रतलामी,बालेन्दु शर्मा दाधीच,अजित बाड्नेकर,उदयप्रकाश,अभय तिवारी, अविनाश दास,जीतेन्द्र चौधरी,ई पंडित श्रीश शर्मा, डा. अरविन्द मिश्र,अविनाश वाचस्पति, दिनेशराय द्विवेदीअशोक पांडेसमीर लाल समीरप्रियंकर, राजेश प्रियदर्शी, अनूप शुक्लज्ञानदत्त पाण्डेअनिता कुमारजाकिरअली ’रजनीश’,रश्मि प्रभा,राज भाटिया,कविता वाचकनवी,संगीता पूरी,रविश कुमार,युनुस खान, अनूप सेट्ठी,नीरज गोस्वामी,गिरीश पंकज,जय प्रकाश मानस,प्रवीण त्रिवेदी,संतोष त्रिवेदी,आकांक्षा यादव,अजय कुमार झा,प्रभात रंजन,कार्टूनिस्ट काजल कुमार  जैसे कई ब्लॉगर साथियों ने विभिन्न विषयों पर खूब लिखा। इन सबके लिए दिल में खूब सारा सम्मान है।


वर्ष-२००८ के बाद आये ब्लॉगरों में श्री प्रेम जनमेजय,दिविक रमेश,विजय कुमार सपत्ति,जी.के.अवधिया,डा. सुभाष राय,सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी,के.के. यादव,खुशदीप सहगल,सतीश सक्सेना, पद्म सिंह,गीता श्री,प्रवीण पाण्डेय,मनोज कुमार,सिद्धेश्वर,केवल राम,रेखा श्रीवास्तव,बंदना गुप्ता,अखिलेश शुक्ल,डा. रूप चंद शास्त्री मयंक,पियूष पाण्डेय,गिरीश बिल्लोरे मुकुल,ललित शर्मा,डा. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर,महेंद्र श्रीवास्तव,कुवंर कुशुमेश,डा. हरीश अरोरा,एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन,विजय माथुर,निर्मला कपिला,रंजना रंजू भाटिया,अल्पना वर्मा  के अलावा  और भी कई खास नाम हैं…अब सबका नाम तो नहीं ले सकता पर नयी पीढ़ी के कई जुझारू ब्लॉगर हैं जैसे हरीश सिंह, डा. अनवर जमाल, यशवंत माथुर,  अनुपमा त्रिपाठी,आशुतोष, अंजू चौधरी, कविता वर्मा, चंद्रभूषण मिश्र गाफिल, दिनेश कुमार उर्फ रविकर, सुमित प्रताप सिंह,डा. मोनिका शर्मा आदि । और भी कुछ नाम है जिन  लोगों की वजह से ब्लॉगिंग हिंदी में मजबूत बन पायी। 


आपकी नज़रों में वे कौन ब्लॉगर हैं  जिन्होनें तकनीकी रूप से हिंदी ब्लॉगिंग को समृद्ध किया है ?
सबका नाम लेना संभव तो नहीं है फिर भी कई प्रमुख नाम है जैसे रवि रतलामी,शास्त्री जे. सी. फिलिप,उन्मुक्त,पंकज नुरुल्ला,आलोक कुमार,अनुनाद सिंह,श्रीश शर्मा,पी. एस. पावला,सागर नाहर,कमल,राजीव खंडेलवाल,विनय प्रजापति,शैलेश भारतवासी, पियूष पाण्डेय,शाहनवाज़,कनिष्क कश्यप,नवीन प्रकाश,रविन्द्र पुंज,गिरीश बिल्लोरे मुकुल आदि ब्लॉगरों ने इस दिशा में काफी काम किया  है । 

हिंदी ब्लॉगिंग की दिशा-दशा पर कुछ कहना चाहेंगे आप?


उत्तर:हाँ क्यों नहीं ? आठ वर्षों के अंतराल में हिंदी ब्लॉगिंग के माध्यम से जो भी पहल की गयी,जो कुछ भी घटित हुआ उसे चमत्कार कहा जा सकता है,क्योंकि उसी का परिणाम है की आज ब्लॉगिंग को न्यू मीडिया का दर्ज़ा प्राप्त हुआ है ।पिछले दिनों चाहे बाढ़ हो या सुखा या फ़िर मुम्बई के आतंकवादी हमलों के बाद की परिस्थितियाँ, चाहे नक्सलवाद हो या अन्य आपराधिक घटनाएँ , चाहे पिछला लोकसभा चुनाव हो अथवा हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनाव या साम्प्रदायिकता, चाहे फिल्में हों या संगीत, चाहे साहित्य हो या कोई अन्य मुद्दा, तमाम ब्लॉग्स पर इनकी बेहतर प्रस्तुति हुयी है। हम दावे के साथ कह सकते हैं की हिंदी ब्लॉगिंग का भविष्य निश्चित रूप से वेहतर है 


कुछ ब्लॉग पोर्टल या वेब मैगजीन को छोड़ दिया जाए तो राजनीति से जुड़े ब्लॉग का अकाल दीखता है हिंदी में, फिर आप दावे के साथ इसे न्यू मीडिया,वैकल्पिक मीडिया या फिर कंपोजिट मीडिया कैसे कह सकते हैं ?

उत्तर:ऐसा नहीं है मनोज जी,हिंदी में राजनीति से जुड़े व्यक्तिगत ब्लॉग का अकाल नहीं है, हाँ कम जरूर है ।जहां तक राजनीति को लेकर ब्लॉग का सवाल है तो अफलातून के ब्लॉग समाजवादी जनपरिषद, नसीरुद्दीन के ढाई आखर, अनिल रघुराज के एक हिन्दुस्तानी की डायरी, अनिल यादव के हारमोनियम, प्रमोदसिंह के अजदक और हाशिया के साथ एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन के लोकसंघर्ष का जिक्र किया जाना चाहिए।

इस बार का ब्लॉगोंत्सव कबतक मनाने का इरादा है और इस बार ५१ ब्लॉगर हीं परिकल्पना सम्मान से सम्मानित होंगे या ज्यादा ?

५१ शुभ अंक है, अभी इससे ज्यादा बढाने की जरूरत मैं महसूस नहीं कर रहा हूँ .....संभव है ५ अप्रैल या फिर उसके बाद ब्लॉगोंत्सव का आयोजन हो । स्थान अभी तय नहीं है ।शीघ्र उद्घोषणा होगी । 

अपने पारिवारिक जीवन के बारे में कुछ बताएं 

उत्तर:८ मई १९८९ को मेरी शादी हुयी थी । श्रीमती जी घर और बच्चों की देख रेख इसप्रकार करती हैं की मुझे इस विषय पर ज्यादा सोचना नहीं पड़ता । फिर साहित्य और ब्लॉगिंग के लिए समय निकालना मेरे लिए काफी आसान हो जाता है । मेरे तीन बच्चे हैं,बड़ी बिटिया मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट में डिप्लोमा करके आगे की तैयारी कर रही है,बेटा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष में है और सबसे छोटी बिटिया बारहवीं का इस बार फाईनल परीक्षा देने जा रही है। और क्या बताऊँ फिर कभी 

इतना कहकर उन्होंने अपनी कई व्यस्तताएं गिनायीं जिसे टाली नहीं जा सकती थी, इसलिए मैंने उनसे इजाजत लेकर कानपुर के लिए प्रस्थान कर गया और बातें अधूरी रह गयी 

शनिवार, 19 नवम्बर 2011

ब्लॉग अकादमी हेतु तैयारियां शुरू,आपके सुझाव आमंत्रित


कल अचानक मेरी निगाह दैनिक जागरण और प्रभात खबर में प्रकाशित इस खबर पर पडी कि ब्लॉग अकादमी हेतु तैयारियां शुरू हो गयी है और यह वेहद ख़ुशी की बात है कि इसके प्रारूप पर मधेपुरा के ब्लॉगर और प्रखर साहित्यकार भाई अरविन्द श्रीवास्तव ने कार्य प्रारंभ कर दिया है . इस विषय पर जब मैंने दूरभाष पर रवीन्द्र प्रभात जी से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि "अकादमी के गठन पर अभी काफी कार्य करना होगा . हमें एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा. यदि इस प्रक्रिया को हनुमान कूद की संज्ञा दी जाए तो शायद न किसी को अतिश्योक्ति होगी और न शक की गुंजायश हीं . इस विषय पर प्रथम चरण में  हम हिंदी तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रखर विद्वानों से गहन मंत्रणा कर रहे हैं ताकि किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सके ."

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि " जब ब्लॉग अकादमी की परिकल्पना की गयी थी तब मैं लखनऊ ब्लॉगर असोसिएशन का अध्यक्ष था और उस समय मैंने लखनऊ ब्लॉगर असोसिएशन और परिकल्पना के संयुक्त तत्वावधान में इसे मूर्त रूप देने की सोची थी . व्यस्तताओं के कारण मैंने स्वयं को एल बी ए के नेतृत्व से अलग कर दिया, किन्तु मैं आज भी भावनात्मक रूप से एल बी ए के समस्त सदस्यों से जुड़ा हूँ . इसलिए संभव है कि आने वाले दिनों में जब ब्लॉग अकादमी की कार्यकारणी का गठन होगा तो उसमें एल बी ए के भी कुछ प्रगतिशील सदस्य शामिल होंगे .साथ हीं इससे कुछ प्रारंभिक और तकनीकी ब्लॉगर्स को जोड़ा जाएगा . विभिन्न भारतीय भाषाओं के कुछ वरिष्ठ और अनुभवी साहित्यकारों के साथ -साथ रंगकर्मी -संस्कृतिकर्मी और पत्रकारों को भी. ताकि वृहद् और व्यापक सोच को मूर्तरूप दिया जा सके."

उन्होंने बताया कि आगामी ९-१० दिसंबर को कल्याण(मुम्बई) में पहली बार यु. जी. सी. की ओर से सरकारी स्तर पर दो दिवसीय ब्लॉगर संगोष्ठी आयोजित की जा रही है जहां एक साथ कुछ अनुभवी ब्लॉगर उपस्थित होकर इस दिशा में आगामी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर विचारविमर्श करेंगे. अब तक प्राप्त सूचना के अनुसार इसमें रवि रतलामी (भोपाल),अशोक मिश्र (मेरठ),अविनाश वाचस्पति(दिल्ली), शैलेश रतवासी(दिल्ली),सिद्दार्थ शंकर त्रिपाठी (लखनऊ) आदि ब्लौगरों के साथ-साथ मैं भी शिरकत कर रहा हूँ. वहां से मैं ११ दिसंबर को कल्याण से लौटने के बाद मैं  १५ दिसंबर को बैंकॉक के लिए प्रस्थान कर जाऊंगा जहां चतुर्थ अन्तराष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन आयोजित है . यह सम्मलेन १५ से २१ तक थाईलैंड के विभिन्न शहरों यथा बैंकॉक,पटाया, कौल्हौर्न,आईलैंड में आयोजित होंगे. १७ दिसंबर को बैंकॉक में मुझे ब्लॉगिंग में उल्लेखनीय कार्य हेतु सृजन श्री सम्मान से सम्मानित किया जाएगा. २२ दिसंबर को मैं लखनऊ वापस आ रहा हूँ जिसके बाद वहुप्रतिक्षित परिकल्पना ब्लॉग विश्लेषण पर कार्य करूंगा."

श्री रवीन्द्र प्रभात ने यह भी कहा कि "अकादमी के गठन में मुझे सबके सुझाव चाहिए . हर किसी के महत्वपूर्ण सुझाव का सम्मान किया जाएगा. उसे गठन की प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाएगा. इसलिए इस दिशा में हर किसी के सुझाव अपेक्षित है."




यह पोस्ट लिखे जाने तक आज के हिन्दुस्तान में भी इस आशय की खबर प्रकाशित हुई है ,जो इसप्रकार है : 


शनिवार, 12 नवम्बर 2011

लोकसंघर्ष सुमन प्रब्लेस के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोनीत

१७ फरवरी २०१२ को प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ एक वर्ष का हो जाएगा . उल्लेखनीय है कि १७ फरवरी २०११ को ज्ञानरंजन जी के घर से लौटकर गिरीश बिल्लोरे मुकुल जी ने इस साझा ब्लॉग पर पहला पोस्ट डाला था. ज्ञान रंजन जी प्रगतिशील विचारधारा के अग्रणी संपादकों और सर्जकों में से एक हैं . उनसे और उनकी यादों इस साझा ब्लॉग का शुभारंभ होना अपने आप में गर्व की बात है. मुझे याद है जब इस साझे ब्लॉग की परिकल्पना मैंने की थी,तब मुझे कतई इस बात का भान नहीं था कि यह धीरे-धीरे एक प्रतिबद्ध संगठन का रूप ले लेगा

मगर हाँथ कंगन को आरसी क्या ? आज मुझे इस बात का फक्र है कि इस साझे ब्लॉग से रवीन्द्र प्रभात,अविनाश वाचस्पति,अशोक कुमार पाण्डेय,कौशलेन्द्र,तेजवानी गिरधर,निर्मला कपिला,एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन,डा. जाकिर अली रजनीश,एस.एम्. मासूम,अख्तर खान अकेला, रश्मि प्रभा जी जैसे अनेक प्रगतिशील बलॉगर जुड़े और इस साझे ब्लॉग के माध्यम से प्रगतिशील चिंतनधारा को आगे बढाया.

आपको याद होगा कि २० फरवरी २०११ को सार्वजनिक रूप से मेरे द्वारा यह घोषणा की गयी थी कि "प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ के रूप में एक ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मंच का गठन किया गया है जहां हम आपके प्रगतिशील विचारों को सामूहिक जनचेतना से जोड़कर हिंदी की समृद्धि की दिशा में कार्य करते हुए उसे एक नया आयाम देंगे,जो- अकेले संभव नहीं, हमें आपका साथ चाहिए .......हमारी कोशिश है कि इस सामूहिक ब्लॉग से वरिष्ठ और अनुभवी चिट्ठाकारो को जोड़ा जाए और उनके माध्यम से नए और प्रतिभावान लेखकों/चिट्ठाकारों को अंतर्राष्ट्रीय फलक पर खुलकर अपनी चिंतनधारा को प्रवाहित करने का अवसर प्रदान किया जाए !इसके लिए हम समय-समय पर देश के प्रमुख शहरों में गोष्ठी/सेमीनार और कार्यशालाओं के आयोजन पर विचार कर रहे हैं ,साथ ही इस सशक्त मंच के सुचारू रूप से संचालन हेतु एक सलाहकार मंडल के चयन की भी हमारी योजना है !यदि आप चाहते हैं कि आपकी प्रगतिशील चिंतनधारा व्यापक जनचेतना से जुड़कर पूरी दुनिया में फैले, तो इस मंच पर आपका स्वागत है, आपको केवल अपना नाम,शहर और ई-मेल आई डी नीचे टिपण्णी बॉक्स में अंकित कर देना है !"

मुझे इस बात की ख़ुशी है कि प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ से जुड़े २५ सदस्यों ने अपने अमूल्य सुझाव प्रेषित किये जिसमें से १६ सदस्यों ने इस संगठन के नेतृत्व की जिम्मेदारी रवीन्द्र प्रभात जी को सौंपने की बात कही. किसी ने उन्हें मुख्य निर्णायक तो किसी ने अध्यक्ष बनाने की अनुशंसा की . इन्हीं अनुशंसाओं के आधार पर मैंने आदरणीय रवीन्द्र प्रभात जी से प्रब्लेस के अध्यक्ष पद स्वीकार करने का अनुरोध किया, किन्तु उन्होंने बार-बार यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि "मैं ऐसे महत्वपूर्ण पद के निर्वहन हेतु स्वयं को अक्षम मानता हूँ . आप किसी सुलझे हुए बलॉगर यह जिम्मेदारी दें और जब कभी भी मेरी आवश्यकता महसूस हो मेरा सहयोग और सुझाव दोनों ले लिया करें . मैं हमेशा प्रब्लेस के साथ खडा रहूँगा. इस बात का विश्वास दिलाता हूँ ."

उन्हें मनाने का क्रम विगत छ: महीने से चल रहा था,क्योंकि मेरा मानना है कि रवीन्द्र जी हिंदी ब्लॉग जगत के वेहद समर्पित और सकारात्मक चिट्ठाकारों में से एक हैं और उनके नेतृत्व में निश्चित रूप से प्रब्लेस नया कीर्तिमान स्थापित करने में कामयाब हो सकता है. खैर हमें फरवरी माह में प्रब्लेस का प्रथम महाधिवेशन मनाना है और मैंने तय किया है कि इस महाधिवेशन में हम अपने नए अध्यक्ष का विधिवत चुनाव करेंगे, कार्यकारणी का गठन करेंगे और तमाम पदाधिकारियों का चुनाव करते हुए इसे एक मजबूत संगठन का रूप देंगे . संभव है प्रब्लेस का प्रथम वार्षिक महाधिवेशन लखनऊ में ही हो. 

इसलिए प्रथम वार्षिक महा अधिवेशन से पूर्व एडवोकेट रणधीर सिंह सुमन को प्रब्लेस के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रदान की जा रही है ,क्योंकि प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ के मनोनीत कार्यवाहक अध्यक्ष श्री रणधीर सिंह सुमन हिंदी ब्लॉग जगत के चर्चित ब्लॉग पोर्टल "परिकल्पना ब्लॉगोत्सव"/लोकसंघर्ष तथा वटवृक्ष पत्रिका के प्रबन्ध सम्पादक तथा बाराबंकी जनपद के वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता हैं साम्यवादी विचारधारा से गहरे प्रभावित हैं और ब्लॉगजगत में लोकप्रिय भी।

उनका मानना है कि प्रब्लेस के केन्द्र में मनुष्य की सामूहिक चिंताएं है इसीलिए इसे व्यक्तिगत मनोविनोद,जय-पराजय, सुख-दुख से ऊपर सामूहिक प्रेम, बन्धुत्व, स्वतंत्रता और समानता को प्रस्तुत करने का माध्यम बनाना होगा । नये मूल्यों के अनुरूप वर्ग, वर्ण,संप्रदायों और जातियों बंटकर ब्लोगिंग करने की प्रवृति से ऊपर उठना होगा ।

मुझे उम्मीद हीं नहीं वरन पूरा विश्वास है कि श्री सुमन जी के नेतृत्व में प्रगतिशील चिट्ठाकारों और चिट्ठों के हित में कार्य करने हेतु ज्यादा से ज्यादा ब्लोगरों को इससे जोड़ा जाएगा और उनके माध्यम से एक नई क्रान्ति की प्रस्तावना की जायेगी इस आन्दोलन को एक मुकाम तक पहुंचाना है, केवल आप प्रबुद्ध जनों का साथ चाहिए !

शुभकामनाओं के साथ-
आपका-
मनोज पाण्डेय


सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

ब्लागिंग पर रवीन्द्र प्रभात की अनुपम पहल ....



इतिहास का मतलब दिक्कालीय परिवेश और घटनाओं के दस्तावेजीकरण का है और इसके लिए इंतज़ार किया जाना प्रमाणिकता को बनाए रखने के लिहाज से जरुरी नहीं है। इतिहास द्रष्टा द्वारा सीधे खुद लिखने के बजाय जब भी कालान्तर में लोगों द्वारा बिखरे हुए साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर इतिहास लिखा जाता है प्रमाणिकता के साथ समझौता करना पड़ता है।


सृजनगाथा में रवीन्द्र प्रभात की ताजातरीन पुस्तक हिंदी ब्लोगिंग का इतिहास पर  डा. अरविन्द मिश्र की सारगर्भित समीक्षा पढ़ने के लिए यहाँ किलिक करें :

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